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World Cinema ‘A Touch of Sin’ Film Review in Hindi by Tushar Waghela

 

World Cinema ‘A Touch of Sin’  Film Review by Tushar Waghela

फिल्म समीक्षा – ए टच ऑफ़ सिन A Touch of Sin  , निर्देशक जिया झांगके

जिया झांगके की फिल्म ए टच ऑफ़ सिन , समकालीन चीन में हिंसा और भष्टाचार का एक रक्त रंजित चित्रण है | चीनी सोशल मीडिया वेबसाईट पर उभरी चार वास्तविक घटनाओं पर आधारित यह फिल्म विश्व की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था को आत्मचिंतन के लिए जरुरी साक्ष्य देती है | अति साहसिक और काव्यात्मक इस फिल्म में चार मुख्य किरदार है जो विभिन्न वजहों से अपनी सहनशीलता के चरम को छू हिंसक ज्वाले के रूप में फट पड़ते हैं | फिल्म की पटकथा भी जिया झांगके ने लिखी है | वर्ष 2013 के कान्स फिल्म महोत्सव में इस फिल्म को सर्वोत्तम पटकथा के लिये सम्मानित किया गया था |

फिल्म की शुरुवात दहाई (जियांग वू) के विद्रोह से होती है | गाँव के मुखिया और स्थानीय पूंजीपति जिन्होंने भ्रष्टाचार के द्वारा सार्वजनिक सम्पतियों को बेचकर बेहिसाब धन अर्जित किया है, दहाई उसका जोर शोर से विरोध करता है पर सारा गाँव मुखिया के प्रभाव कि वजह से दहाई के ही विरोध में रहता है बल्कि उसे अपमान, उपहास, ताने और मजाक का पात्र बनाता है | इस अपमान का प्रतिफल दहाई से हिंसक हत्याओं के रूप में होता है|

ज़्हऔ सेन एक मृत आँखों वाला निर्दयी हत्यारा है जो केवल तमंचे की भाषा बोलता है, वह पहाड़ो के बीच बसे अपने गाव लौटता पर गॉव में भाई, माँ और पत्नी उससे बहुत प्रसन्न नहीं दिखते | यह आदतन अपराधी वहां से चला जाता है, यह जाना उन हजारों मजदूरो की तरह ही होता है जो किसी अन्य बड़े शहर काम की तलाश में जाते है पर फर्क केवल इतना है कि ज़्हऔ सेन खानाबदोश, पेशेवर की तरह लूटपाट और हत्याएं करता है |

यह फिल्म मन मस्तिष्क में एक तरह का आपातकाल ले आती है | हमें वर्तमान चीनी समाज के रगों में  दौड़ते धधकते असंतोष और उनके फट पड़ने पर लहू के छीटों से भिगोती है |

तीसरे भाग में किरदार क्सिओं यु जिसे ज्हाओ ताओ ने अभिनीत किया है जिया झांगके की पत्नी एवं उनकी अधिकतर फिल्मो की अभिनेत्री है | एक विवाहित पुरुष के साथ प्रेम सम्बन्ध में है और उसे पत्नी को तलाक देने या उनके सम्बन्ध को समाप्त करने का दबाव रखती है | वह पत्नी के कोप का शिकार बनती है कुछ व्यक्ति उससे मारपीट करते हैं | क्सिओं यु एक सौना बाथ पार्लर में रिसेप्सनिस्ट है एक ग्राहक उसे मसाजर समझकर जबरदस्ती करता है उसके मना करने पर भी वह उसे अपने धन के बल पर अपमानित कर नोटों की गड्डी से उसे मारता है | दिनभर की हताशा और अपमान को सहते हुए वह सुकोमल से हिंसक प्रतिशोध से भरी नारी में बदल जाती है |

जिया झांगके फिल्म के डायरेक्टर’स नोट में कहते हैं – यह फिल्म चार मौतों और चार घटनाओं से जुडी है जो हाल के वर्षो में घटित हुई है : तीन हत्याएं, एक आत्महत्या | यह घटनाएं पूरे चीन में बहुत चर्चित रहीं हैं, वे शांक्सी, चोंगकुइंग, हुबेई और ग्वांगडोंग में घटित हुई जो कि उत्तर से दक्षिण तक देश के अधिकाँश भाग में फैली हुई है | मैं इन समाचारों से समकालीन चीनी जीवन का चित्र बनाना चाहता था | चाइना बहुत तेजी से बदल रहा है, पहले की तुलना में बहुत अधिक समृद्ध हो चला है, पर पूरे देश में फैले संपत्तियों के असमान वितरण धनी – निर्धन के बीच गहरे आर्थिक असमानताओं की वजह से कई लोग व्यक्तिगत संकटों में घिरते जा रहें है | हिंसा में इजाफा हुआ है | इतना स्पष्ट है कि कमजोर का अपने आत्मसम्मान को वापस पाने के लिए हिंसा का सहारा लेना सबसे त्वरित और सीधा रास्ता हो गया है .......... मुझे ऐसा लगता है की यह फिल्म लोगो के बीच छिपे अंतर्संबंध की है, जो हमारे समाज के क्रमविकास पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं | इस सभ्य समाज में जिसे विकसित करने में हमने इतना समय लिया है, दरअसल एक मनुष्य का दूसरे से नाता क्या है ?

 

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